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मिलन की उदासी

Posted On 30 Sep, 2017 में

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लम्बे अरसे बाद मिली हैं हम ….शायद शादी के बाद दूसरी दफा …इस से पहले वाली मुलाक़ात तो बस एक दूसरे को देख लेने और शादी के बाद की नोंक – झोंक तक ही सीमित रही थी….फिर कई बार बात हुयी थी हमारी पर अपने अपने परिवार की तारीफों ( या फिर यूं कह लो की अपने अहं को सहला सहला कर ही रह गए थे …..
” मेरे ससुर जी ने मेरा जन्मदिन इतनी धूमधाम से मनाया की मैं तो फूली न समायी ….पापा की कमी जिंदगी में पूरी कर दी उन्होंने ….और सासु माँ का तो पूछो ही मत बहुत ही काम बोलती है..रसोई हमारे हवाले कर दी है…जैसे मर्जी रहो…”

” और मेरे का तो सुनो …….इतना सुन्दर, धीर, गंभीर पति पाकर मैं तो धन्य हो गयी हूँ…. ससुर जी तो गांव भर में तारीफे करते नहीं थकते मेरी….कहते हैं..इतनी पढ़ी लिखी बहु पाकर मैं तो बहुत खुश हूँ….’माँ जी’ तो मम्मी की याद ही नहीं आने देती..एकदम गंगा की तरह पवित्र हैं…जबान की थोड़ी कड़वी हैं,,,जो सभी सीधे-साधे लोग होते हैं….और वो हिदायतें तो हमारी भलाई के लिए होती हैं न…”
बस इसी तरह की बातें होती थीं! ये और है की हम एक दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं…तो उम्मीद में होते थे की कभी तो फिर मिलेंगे सच में बोलने और बतियाने के लिए…
खैर ……..कल न जाने मुझे क्या हुआ… चल पड़ी …….. मेरे ऑफिस से थोड़ी दूर ही तो रहती है वो……वैसे तो उसकी बेटी को जन्मे 3 महीने हो गए पर कल थोड़ी ज्यादा ममता उमड़ी मेरे अंदर उसको देखने की ……डॉक्टर कि हिदायत याद आयी जब उसने कहा था 4 -5 साल तक बच्चे कि ख्वाहिश मत रखना तुम …….नहीं तो दवाओं कि वजह से…………और अधूरा छोड़ दिया था sentence उसने….
बताते बताते आँखों में आंसू आ गए थे उसके…………
ज्यादा मुश्किल नहीं होती मुझको कोई एड्रेस ढूंढने में मुझको सो मैं finally उस 5 मंजिला इमारत के सामने खड़ी थी जिसके सेकंड फ्लोर पर उसका घर था……
उस मकान में घर रूम नंबर के हिसाब से थे …..मैंने चारो तरफ नजरें घुमाई ……12 खड़िया से लिखा हुआ था ..
नॉक करते करते हाथ कांप गए मेरे न जाने क्यों?
उसने दरवाजा खोला …….पहली नजर में ही दिख गया मुझको इतनी मोटी तो नहीं हुयी है वो…जितनी व्हाट्सप्प वाले फोटो में लग रही थी…..बच्ची तो एकदम दुबली सी लग रही थी…..
एकतरफ फेंका मैंने पर्स को और लपक लिया बेटी को उसकी गोद से……बहुत देर तक सीने से लगाए रही थी मैं ….एक नया एहसास हुआ मुझको …बहुत समय के बाद किसी ‘और’के बच्चे को दिल से सटाये थी मैं….और मुझको तो जैसे प्यासे और पानी का संगम हो महसूस हो रहा हो……… उसके पति को आने में आधा घंटा लग गया था ..तब तक मैंने घर कि ख़ामोशी और उसकी चुप्पी से अंदाजा लगा लिया था वातावरण का…..
ज्यादा गर्माहट भी महसूस नहीं कि मैंने उसकी बातो में……उसके पति ने बताया मुझको कि पिताजी उनके जो अभी थोड़ी देर में आने वाले थे थोड़े से बच्चो कि तरह व्यव्हार करते हैं इस उम्र में आकर………..
मुझको कुछ समझ आता इतने में नजरें मिली हमारी और मैंने महसूस कर लिया…
रात में २ बजे तक बात करते रहे थे हम…अपनी-अपनी परेशानियां साझा करते रहे…. सुबह तक बहुत कुछ पता चल गया था एक दूसरे के बारे में..
जैसे उसके ससुर जी बोलते बहुत हैं…उसके पति माँ बाप के कहने में चलते हैं….और ये भी कि उसकी जरुरत पूरी करने के अलावा वो लोग और कुछ भी नया नहीं करते……..मैंने भी बता दिया कि कैसे यहाँ आके हमने कितनी मुश्किलें झेली हैं…….और मेरे पूज्य ससुर ने मुझको बिलकुल भी पैसे नहीं दिए थे …एक नन्हें बच्चे की जरूरतें नहीं पूरी कर पा रहे थे….
आते-आते सारी छिपी दबी बातें बाहर आ चुकी थी….जान चुके थे कि एक ही स्थिति है हमारी……
वो पैसो के लिए अपने पति पर निर्भर है क्योकि वो कमाती नहीं और मैं इसलिए कि मुझको डर है कहीं इन छोटी छोटी चीजों के लिए मुझे कोई बात न सुननी पड़े………….

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